(holi 2022) ऐसा गांव जहां पर 200 वर्षों से नहीं मनाई जाती है होली

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(holi 2022) ऐसा गांव जहां पर 200 वर्षों से नहीं मनाई जाती है होली

भारत के सभी क्षेत्रों में होली(holi 2022) का त्योहार बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है|लोग एक दूसरे को रंग गुलाल और अबीर लगाते हैं| इस त्यौहार पर गुजिया पापड़ इत्यादि ऐसे अनेक पकवान हमारे घर में बनाए जाते हैं और मेहमानों को खिलाया जाता है| लेकिन अगर हम आपसे कहे कि भारत में कुछ ऐसे स्थान भी है जहां पर होली(holi 2022) मनाना अशुभ माना जाता है| और होली के दिन इन क्षेत्रों में सन्नाटा पसरा रहता है|तो यह बात थोड़े समय के लिए आपको सच न लगे|दो हम आपको एक ऐसे गांव के बारे में बताने वाले हैं जहां पर पिछले  200 वर्षों से होली का त्यौहार नहीं मनाया जाता है|

holi 2022
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मुंगेर का सती गांव

यह गांव मुंगेर जिला मुख्यालय से लगभग 50 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है| इस गांव में 200 वर्षों से होली नहीं मनाई जाती है|ग्रामीणों से इसके बारे में पूछने पर उनका जवाब  है कि यह वर्षों से चली आ रही परंपरा है| और जो इस परंपरा को तोड़ेगा उस पर बहुत बड़ी आपदा आएगी| इसलिए पिछले 200 वर्षों से इस गांव में होली नहीं मनाई जाती है|

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वहीं कुछ अन्य ग्रामीण किंवदंतियों पर आधारित बातें बताते हैं कि इस गांव में 200 साल पहले एक वृद्ध दंपति रहते थे| होलिका दहन के दिन उस वृद्ध औरत के पति का निधन हो गया| इस घटना से दुखी होकर उसकी पत्नी ने सती होने की इच्छा जाहिर की|लेकिन गांव वालों ने पत्नी को घर में बंद कर दिया| पति की अर्थी को समसान ले जाने के दौरान उनका शव गांव से बाहर जाने के पहले ही बार बार गिर जाता था| इससे परेशान होकर गांव वालों ने उस वृद्ध की पत्नी को बुलाया| अब अर्थी को श्मशान ले जाते समय किसी भी प्रकार की दिक्कत नहीं हुई| जब उस वृद्ध  का दाह संस्कार किया जा रहा था तो उसी समय उसकी पत्नी उसकी  चिता पर बैठकर सती हो गई|

जहां पर 200 साल पहले वह वृद्ध औरत सती हुई थी|वहां पर आज भी सती मंदिर है|जिसका निर्माण उस समय ग्रामीणों ने करवाया था| इस गांव का नाम भी इसी घटना के बाद सती रखा गया| गांव वालों का कहना है कि हमारी माता होलिका के दिन सती हुई थी| इसी दुख के कारण हम लोग पिछले 200 वर्षों से होली का त्योहार नहीं मनाते हैं|और ना ही हमारे घर में कोई पकवान बनाए जाते हैं|

इस गांव की कुल जनसंख्या लगभग 2000 से अधिक है| इनके पूर्वजों की यही परंपरा चली आ रही है जिसका यह आज भी निर्वाह कर रहे है| गांव वालों ने बताया कि कुछ लोग इस गांव को छोड़कर भी चले गए हैं|और वह वहां पर भी होली नहीं बनाते हैं| उनका यह कहना है कि इस गांव का कोई भी ग्रामीण अगर इस परंपरा को तोड़ने का प्रयास करेगा तो उस पर बड़ी से बड़ी विपत्ति आ जाएगी|